Logo
International Journal of
Educational Research and Development

Search

ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 4 (2025)
मनोविज्ञानिक एवं दर्शन में पारस्परिक सहसम्बंध
Authors
Dr. Gajendra Pal Singh
Abstract
दर्शन भारतीय मुनियों के द्वारा अनुभूत सत्य का परिचय देनेवाला साहित्य है। प्रकृति ने भारतवर्ष को अपनी खेल वाटिका बनाया है। जिसके कारण यहा भौतिक जीवन के निर्वाह करने वाले साधनों की अधिकता प्राचीन काल से रही है। इसलिये यहॉं के विद्वानों ने तपस्या तथा आत्मज्ञान के बल पर अध्यात्मत्व का विशेष चिन्तन कर प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन ही नही किया, अपितु अपने जीवन को उन तत्वों के अनुशीलन द्वारा पुर्वत्व की अरूणिमा पर पहुॅंचाया। वास्तविकता यह है कि शिक्षा समाज का जीवन है, उसकी आत्मा है। किसी ने कितना सुन्दर कहा है शारिरिक जीवन के लिए पोषण एवं पुनः उत्पत्ति का जो महत्व है सामाजिक जीवन के लिये उतना ही महत्व शिक्षा का है। शिक्षा लोगो की वृद्धि एवं विकास को सामूहिक हित की ओर अग्रसर करती है। शिक्षा एक भावात्मक एवं रचनात्मक शक्ति है जो सामाजिक व्यवस्था द्वारा प्रभावित भी होती है। वास्तव मे शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था एक दूसरो से सम्बन्धित है। श्रेष्ठ एवं नवीन सामाजिक व्यवस्था के पुनः निर्माण मे शिक्षा को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

Download
Pages:52-53
How to cite this article:
Dr. Gajendra Pal Singh "मनोविज्ञानिक एवं दर्शन में पारस्परिक सहसम्बंध". International Journal of Educational Research and Development, Vol 7, Issue 4, 2025, Pages 52-53
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.