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VOL. 7, ISSUE 3 (2025)
जत्रुऊर्ध्व रोगों के प्रबंधन में नेति क्रिया एवं नस्य कर्म की उपयोगिता
Authors
देवेश कुमार, डॉ. ऊधम सिंह
Abstract
वर्तमान समय में मनुष्य में नाक] कान] गला] वाणी] के रोग तथा बालों का असमय सफेद होना व झड़ना आदि रोग बहुत तीव्र गति से बढ़ रहे हैं। ये सभी रोग कन्धे से ऊपर के अंगों में होते हैं इसलिए इन्हें जत्रुऊर्ध्व रोग कहा जाता है। चूंकि जत्रु का अर्थ है कंधा तथा ऊर्ध्व का अर्थ है ऊपर इसलिए इन्हें जत्रुऊर्ध्व, रोग कहा जाता है। इनके उपचार के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की औषधियों का सेवन किया जाता है जो कुछ समय के लिए तो आराम देती हैं किन्तु कुछ समय पश्चात और भी विकृत रूप में सामने आता है। जो यह स्पष्ट करता है कि यह समस्या का स्थायी समाधान न होकर अस्थायी समाधान है। उपरोक्त रोगों का स्थायी समाधान योग ऋषियों एवं आयुर्वेदाचार्यों ने पूर्व में ही योग एवं आयुर्वेद ग्रन्थों में बताया है। योग में षट्कर्म में नेति क्रिया एवं आयुर्वेद के पंचकर्म में नस्य कर्म का वर्णन प्राप्त होता है। किन्तु जानकारी के अभाव में समाज इन सस्ती सुलभ एवं स्थायी चिकित्सा प्रणालियों से दूर ही रहा। प्रस्तुत शोध-पत्र में उपरोक्त जत्रुऊर्ध्व रोगों के प्रबंधन में नेति क्रिया एवं नस्य कर्म की उपयोगिता को सुझाया गया है जो समाज को स्वास्थ्य लाभ प्रदान कराने में सहायक सिद्ध होगा।
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Pages:12-14
How to cite this article:
देवेश कुमार, डॉ. ऊधम सिंह "जत्रुऊर्ध्व रोगों के प्रबंधन में नेति क्रिया एवं नस्य कर्म की उपयोगिता". International Journal of Educational Research and Development, Vol 7, Issue 3, 2025, Pages 12-14
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